लोग क्या कहेंगे?

 दोस्तों आज की तारीख में लोग कुछ भी करने से पहले यह सोचते हैं कि लोग क्या कहेंगे आज हम आपको इस आर्टिकल में यही बताएंगे तो चलिए शुरू करते हैं।

Sabse bada rog kya kahenge log?

दोस्तो जमाना इतना आगे निकल चुका है। लेकिन लोग अभी भी वहीं के वहीं हैं। जी हां दोस्तों अब आप सोच रहे होंगे कि मैं  ऐसा क्यों कह रही हूँ? क्योंकि दोस्तों ये जो हमारा समाज है, जिस society में हम पले-बढ़े है । ये ना ही तो चैन से जीते है और नही जीने देते हैं।

अगर हम कुछ भी करना चाहते है तो अक्सर हमें अपने guardian के मुंह से सुनने को मिलता है कि लोग क्या कहेंगे?

   अब आप ही बताओ कि हम लोंगों की बकवास कहानियां सुने या अपने दिल की आवाज सुने। क्या लोग हमारी चिंता करते हैं, जो हम लोंगो की चिंता करें। लोंगों का काम है सिर्फ कहना। हम क्यों दूसरों की बातों में आकर अपनी life खराब करें।



कई बार क्या होता है कि हमें जो बनना होता है, वह हम ठान लेते हैं  कि हम बनकर रहेंगे जैसे ही हम अपने लक्ष्य को भेदने वाले होते हैं। वैसे ही हमें सुनने को मिलता है कि  अगर तुम यह काम करोगे तो लोग क्या कहेंगे?  तो दोस्तों आप देख रहे होंगे की  बीच में ये शब्द फिर से आ गया कि लोग क्या कहेंगे? लोग से हमें क्या मतलब है? हमें जो चीज करने है,  हमने जो चीज ठान ली है,  हमारा जब interest उसी चीज में है,  तो लोग क्या बीच में खिचड़ी पकाएंगे?  तो दोस्तों हमें जो बनना है, सो बनना है।  इसमें लोग क्या कहते हैं, लोगों की क्या राय है?  हमें कोई मतलब नहीं होनी चाहिए।
इसके लिए मैं आपको दो तीन example देती हूं।

          दरअसल इस तरह की समस्या अधिकांश गांव में होती हैं। अक्सर सुनने को यह मिलता है कि अगर तुम ये करोगे तो लोग क्या सोचेंगे? भाई, लोग खुद तो ये काम कर सकते नही हैं या यूं कहो कि सक्षम नहीं है। बस ये लोग  दखलअंदाज करने आ जाते है।
Sabse bada rog kya kahenge log?

       अधिकतर लड़कियों  के साथ इस तरह की समस्या आ जाती हैं। अभी भी सोच के पिछड़े हुए ऐसे बहुत से लोग हैं। जो कि हमें आगे नहीं बढ़ने देते हैं। अगर लड़की कोई भी काम करना चाहती है तो सबसे पहले यह समाज सामने आ खड़ी होती है कि ये लड़की है, यह इस तरह का काम नहीं कर सकती है। अरे क्यों नहीं कर सकती हैं, क्या काम पर यह लिखा हुआ है  कि ये काम लड़की के लिए है और ये काम लड़कों के लिए है, अरे नहीं न! भाई अपनी - अपनी सोच बदलो।

अभी भी ऐसे कितने सारे गांव है? जहाँ पर लड़कियों को बाहर नही निकलने दिया जाता है, औरतें जो कि अभी तक घूंघट के अंदर रहती हैं। घर से बाहर निकलना तो दूर, उन्हें बोलने तक का हक नही है किसी मामले में। लोंगों की सोच अभी भी इतनी पीछे है कि पता नहीं ये समाज, ये गांव कब सुधरेगा।

शायद इन नीची सोच के लोगों को यह नहीं पता है कि आज के तारीख में चाहे लड़कियां हो या फिर महिलाएं सब मिसाल कायम कर रही हैं। इसलिए हमें इस तरह की बातों से निराश नहीं होना है। हमें demotivate नहीं होना है। जितना हम इन सब चीजों के बारे में सोचेंगे उतना ही हम असफलता की ओर  जाते चले जाएंगे।  चूँकि  इस तरह की बात अक्सर सामने आती रहती है। तो खुद को depression में नहीं डालना है और अपने सिर्फ aim, goal पर ध्यान देना है।